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कप्तान साहब एक नजर इधर भी

जिला न्यायालय की बंदी हवालात में चलता है वीआईपी कल्चर

सुशील बौद्ध
गाजियाबाद। पुलिस के आला अधिकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक साहब को जिला न्यायालय की बंदी हवालात की तरफ एक नजर डाल देंगे तो कई कड़वी सच्चाई उनके सामने उजागर हो जाएंगी। न्यायालय की बंदी हवालात पर तैनात पुलिस सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रही है। जिला जेल से जो बंदी न्यायालय में मुकदमे की तारीख से संबंधी पेशी पर लाए जाते हैं उनके साथ न्यायालय की हवालात में जानवरों जैसा व्यवहार होता है। यहां 15 गुना 30 फुट की 4 हवालात हैं। इस छोटी सी जगह में 80 से 90 बंदियों को जानवर की तरह ठूंस दीया जाता है। बंदी अथवा उसके परिजन ₹200 नजराने के तौर पर पुलिस कर्मियों को दे देते हैं वह हवालात की गैलरी में आराम से घूमते दिखाई दे सकते हैं।
जो बंदी पैसा नहीं दे पाता उसे अंदर ठूंस दिया जाता है जहां बैठने के लिए भी जगह नहीं होती। सारा खेल प्रतिदिन एक सिपाही की सरपरस्ती में चलता रहता है। कप्तान साहब किसी दिन इस तरफ नजर डालें तो सब कुछ सामने आ सकता है।

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