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आखिर किसके लिए है यह लोकतंत्र

लोकतंत्र के लिए कहा जाता है कि वह तंत्र जो लोग के हित में है। वर्तमान हालत में भारत में ऐसा कुछ नजर नहीं आता। सरकारों ने सब कुछ जनता के ऊपर ला देना शुरू कर दिया है। सोच कर देखिए सरकार ने पैसे वसूलने वाली सारी चीजें अनिवार्य कर दी हैं लेकिन क्या ऐसी कोई चीज सरकार ने अनिवार्य की है जो आपके जीवन की बुनियादी जरूरत यानी रोटी, कपड़ा और मकान से जुड़ी हो। क्या सरकार ने कहा कि हर नागरिक का तीन समय पोषण से भरपूर भोजन करना अनिवार्य है और यदि किसी को यह उपलब्ध नहीं है तो सरकार उपलब्ध कराएगी। क्या सरकार ने कहा है कि हर बीमारी का इलाज अनिवार्य है और अगर कोई सक्षम नहीं है तो उसका इलाज सरकार कराएगी। क्या भोजन और बीमारी को आधार नंबर से जोड़ना अनिवार्य किया किया गया है ताकि नमस्कार जी यदि कोई आदमी भूखा या बीमार हो तो उसे सरकार दवा और भोजन पहुंचाएगी। क्या सरकार ने नौकरी और रोजगार को आधार या पैन कार्ड से जोड़ा है ताकि किसी की नौकरी जाए या रोजगार बंद हो जाए तो उसे तत्काल अपनी जरूरत के लायक पैसा मिलना शुरू हो जाए। कहने का अर्थ यह है कि ऐसी एक भी चीज अनिवार्य नहीं की गई जो नागरिक की जरूरत है। केवल वही चीजें अनिवार्य की गई है जिन से जनता का खून चूस कर सरकारों की कमाई होनी है। सरकार ने कितना कुछ आपके जीवन में अनिवार्य कर दिया है। वैक्सीन लगवाना अनिवार्य कर दिया गया है तो आधार कार्ड भी लगभग अनिवार्य है क्योंकि वैक्सीनेशन, पैन और आयकर रिटर्न सब कुछ उससे ही जोड़ना है। यदि आपके पास गाड़ी है तो आपके ही टैक्स के पैसे से बनी सड़कों पर चलने के लिए आपको पैसा देना है। इसके लिए फास्ट टैग अनिवार्य कर दिया गया है। अगर आपकी गाड़ी पर मास्टर नहीं लगा है तो हाईवे पर जुर्माने की शक्ल में आपको कई गुना ज्यादा शुल्क देना होगा। अब केंद्र सरकार सारी गाड़ियों पर जीपीएस अनिवार्य कर रही है जिसे गाड़ी मालिक के खाते से जोड़ा जाएगा और हाईवे पर थोड़ी दूर चलने का पैसा भी सीधा खाते से काट लिया जाएगा। वाहनों के लिए सरकार ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य कर दी है और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट न होने पर वाहन मालिक पर जुर्माना लगाया जाएगा। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के बाद भी वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है। स्मार्ट मीटर के नाम पर सरकार बिजली के सारे कनेक्शन प्रीपेड करने जा रही है ताकि आप एक यूनिट बिजली मुफ्त तो छोड़िए उधार में भी नहीं जला सके। इधर आपका जमा किया पैसा खत्म हुआ और उधर आपकी बिजली कटी। अनिवार्यता की हद यह है कि बैंक खातों में न्यूनतम जमा की अनिवार्यता इस हद तक है कि भारतीय स्टेट बैंक में जनधन खातों से भी 165 करोड रुपए काट लिए हैं। दुनिया भर के सभ्य और आधुनिक लोकतंत्र में सरकारें आम नागरिकों के लिए काम करती है लेकिन भारत में इसका उल्टा हो रहा है। यहां नागरिक सरकारों के लिए काम करते हैं और सरकार केवल चुनाव जीतने की तिकड़म में लगी रहती है। लोकतंत्र को जनता के लिए, जनता का और जनता द्वारा शासन कहा गया है लेकिन भारत में जनता केवल शासित होने के लिए है। जो सेवक चुने जाते हैं वे जनता की सेवा नहीं करते बल्कि जनता के ऊपर शासन करते हैं। जनता को केवल कर्तव्यों की याद दिलाई जाती है अधिकार केवल उन माननीयों के लिए रह गए हैं जिन्हें जनता चुनकर अपने हित के लिए सरकार बनाने को भेजती है। इस तरह से लोकतंत्र और लोक कल्याणकारी सरकार की अवधारणा को सिर के बल खड़ा कर दिया गया है जहां केवल जनता को दबाया जा रहा है।

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