Breaking Newsउत्तर प्रदेशराष्ट्रीयहमारा गाजियाबाद

दो नवयुवा धनवान बहनों का, फरेबी धन-दौलत, मोह-माया को ठेंगा

(अदिती समर्थ – आयएनएन भारत मुंबई)
सदियों से जहां विश्व के अधिकांश लोग धन-दौलत कमानें के लिए इन्सानियत भी भूलकर हैवान तक बन जाते है, वहां जन्म से प्राप्त करोड़ों की संपत्ति को त्याग कर संन्यासी बनने की परंपरा केवल भारत की सनातन भूमी है।

इसी परंपरा की पार्श्वभूमी पर दो सगी युवा बहने दृष्टि और पूजा धनवान परिवार से होने के बाद भी अब संन्यासी बनने जा रही हैं । आनेवाले 13 मार्च को संत दीक्षा लेकर अपने परिवार की करोड़ों की संपत्ति का भौतिक सुख त्याग कर यह दोनों बहनें जैन संन्यासी बनने जा रही है।

यह कहानी है, सूरत के एक प्रतिष्ठित धनवान मालवाडा परिवार की दोनों युवा बेटियों को इस अमीर परिवार ने अबतक वह सारे सुख और सुविधा दिए हैं। जिसे आम लोग सपने में भी देख नहीं सकते, लेकिन फिर भी परिवार द्वारा दिए गए तमाम सुख-साधनों से आकर्षित होने की बजाय संन्यासी जीवन उन्हें आकर्षित कर रहा है।‌

गुजरात के सूरत शहर के कपड़ा उद्योगपति मालवाडा की दो युवा बेटीयां 17 साल की दृष्टि और 14 साल की पूजा दोनों सगी बहने हैं।‌ पढ़ाई करते-करते अचानक इन दोनों को मोह-माया से लगाव ख़त्म हुआ और इन‌ दोनों ने स्वेच्छा से संन्यास लेकर मोह-माया भरी दुनिया को पीठ दिखाकर व्रतस्थ जीवन जीने का निर्णय लिया है । इसके तहत यह दोनों बहनें 13 मार्च के दिन दीक्षा लेकर पिता की करोड़ों की संपत्ति का त्याग कर संन्यासी बन जाएंगी ।

दोनों बहनों ने जब अपने मन की बात परिवार के सामने रखी और कहा कि वह संन्यास दीक्षा लेना चाहते हैं तब उनका परिवार काफी आश्चर्यचकित हो गया था। उनके इस अकल्पनीय निर्णय से अचंभित हुए परिवार ने उन दोनों को मनाने के लिए कई प्रयास किए लेकिन सब बेअसर सिद्ध हुए। जिसके बाद इतनी छोटी उम्र में दीक्षा लेने का फैसला करने वाली दोनों बेटियों की परीक्षा लेने का विचार किया गया। और आखिर इन दोनों बहनों को दुनिया की चकाचौंध दिखाकर उनके वैराग्य भरे मन को रिझाकर फिर से उनका ध्यान ऐशभरी सुखवस्तू भौतिक लेकिन भ्रमित जीवनशैली की तरफ झुकने हेतु दृष्टि और पूजा को नौं देशों का ग्लैमर भ्रमण करवाया गया। उन्हें सबसे महंगे क्रूज की सवारी भी करवाई गई, जहां सभी प्रकार के भौतिक सुख उपलब्ध होते हैं।‌ लेकिन दृष्टि और पूजा को ग्लैमर भरे जीवन में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई दी। उन्हें इसमें से कुछ भी अच्छा नहीं लगा और दृष्टि और पूजा नें विदेशों की ट्रिप पूरी होने पर भी वह अपना संन्यासी बनने का निर्णय बदल न पाए।

युवावस्था की दृष्टि और पूजा को विदेशी जीवन और चकाचौंध से ज्यादा स्वच्छ सादगी भरा संन्यासी जीवन व्यतीत करना ही अच्छा लगा। आज के भौतिक युग में सुख के पिछे भागने वाले युवाओं दृष्टि और पूजा को करवाया गया 9 देशों का सफर भी चकाचौंध की तरफ आकर्षित करने सफल नहीं हुआ।‌‌ अब आनेवाले मार्च महीने में यह दो बहनें एक साथ दीक्षा लेने जा रही हैं।

इस बारे में दोनों बेटियों की मां ने कहा कि, हमने अपने दोनों बेटियों को राजकुमारी की तरह पाला-पोसा है लेकिन अब वह बहुत जल्द ही जैन भिक्षुक जीवन बिताएंगी। इसलिए हमने दोनों बेटियों को यह बताना जरुरी समझा कि, जैन दीक्षा जीवन काफी कठिन है। हमारी दुनिया में सुखी भौतिक जीवन भी होता है, जिससे आने वाले वक्त में उन्हें यह न लगे कि, उन्होंने भौतिक जीवन देखा ही नहीं है। इसलिए हमने उनको विदेश का सफर भी करवाया, लेकिन वह अनुभव करने पर भी वह दीक्षा ले रही हैं।‌ विदेशी जीवन और चकाचौंध से ज्यादा दृष्टि और पूजा को संन्यासी जीवन अच्छा लगा।‌‌

हमें खुशी है कि, दुनिया में उपलब्ध भौतिक सुख देखने के बाद भी हमारी बेटियां अपने निर्णय पर कायम रहीं, तो संन्यास जीवनशैली मे आनंद प्राप्त करेंगी। हालांकि, एक मां के लिए यह काफी मुश्किल घड़ी होती है, फिर भी बेटियां दीक्षा ले रही हैं उस बात का हमें गर्व भी है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close