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कृषि कानून बनने लगे थे भाजपा के गले की फांस, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सता रहा था हार का डर

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गाजियाबाद। आज बुंदेलखंड रवाना होने से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर एक ऐसा मास्टर स्ट्रोक खेला है जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। कृषि कानूनों की वापसी विशेष तौर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करेगी।
केंद्र सरकार द्वारा आनन-फानन में तीन कृषि कानून बनाए थे जिनका विपक्ष के अलावा किसान संगठन विरोध कर रहे थे। किसान संगठनों ने 11 माह पूर्व दिल्ली के उत्तर प्रदेश और हरियाणा बॉर्डर पर रास्ते रोक कर आंदोलन शुरू किया था जिसका हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में चौतरफा असर दिखाई दे रहा था। किसान आंदोलन के फल स्वरुप भाजपा और सरकार के खिलाफ जो जन्म भावनाएं करवट ले रही थी उनसे यह बात स्पष्ट तौर पर दिखाई देने लगी थी कि 2022 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान किसान आंदोलन भाजपा को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में हुई किसान पंचायत में उमड़ी भीड़ के बाद से ही भाजपा के होश उड़ने लगे थे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर क्षेत्र में वर्ष 2013 के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दबंग जाति जाट रालोद का दामन छोड़कर भाजपा के साथ जुड़ गई थी। इस बात के परिणाम लगातार दिखाई दिए। 2017 में संपन्न उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिम की 136 सीटों में से भाजपा के खाते में 109 आई थी जबकि इससे पूर्व 2012 के चुनाव में भाजपा केवल 38 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी थी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और रालोद के गठबंधन के चलते भाजपा को 2014 के मुकाबले और सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था।
किसान आंदोलन के बाद से जिस तरह सपा और रालोद मिलकर किसानों के बीच जन जागरण कर रहे थे उससे लगातार भाजपा का ग्राफ नीचे जा रहा था। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के पास जाट और मुस्लिम मतदाताओं का गठबंधन टूट गया था जो अब एक बार फिर करवट ले रहा था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और मुस्लिम गठबंधन एक बार फिर शक्ल ले रहा था । यही भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश चुनाव में सबसे बड़ा संकट बनने वाला था। कृषि कानूनों की वापसी के बाद इस क्षेत्र की राजनीति में निश्चित तौर पर बदलाव होगा जो अभी भविष्य के गर्भ में है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खेला गया यह मास्टर स्ट्रोक निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करने वाला साबित होगा।

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