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जड़ होता भारतीय समाज

विज्ञान और तकनीक में आगे निकलने की दुनिया में जबरदस्त होड़ चल रही है और उनके बीच भारत की क्या संभावना हो सकती है ऐसे सवाल कहीं दब कर रह गए हैं। नतीजतन कभी विकास संबंधी किसी इंडेक्स में हम बांग्लादेश से भी पीछे नजर आते हैं तो कभी भूखंड देशों की गिनती में हमारा नाम आ जाता है। हालांकि यह स्थिति देश के लिए शर्मनाक है लेकिन फिर भी कुछ खबरों से अवश्य बेचैनी पैदा होती है और होनी चाहिए कि चीन दुनिया का सबसे धनी देश बन गया है जबकि हम केवल यह कहते ही रह गए कि भारत को विश्व की महाशक्ति बनाना है। मैनेजमेंट कंसलटिंग कंपनी मैकेन्सी की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने सबसे ज्यादा धनी देशों की सूची में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। भारत में इस खबर से बेचैनी इसलिए पैदा होनी चाहिए थी क्योंकि चीन और भारत लगभग एक जैसी परिस्थितियों वाले देश हैं। दोनों देशों ने औपनिवेशिक अतीत से निकलकर लगभग एक साथ आजाद होते हुए अपनी यात्रा शुरू की थी बल्कि चीन में तो क्रांति भारत की आजादी के 2 साल बाद हुई। दोनों विशाल आबादी वाले देश हैं। दोनों की समस्याएं उस समय एक जैसी थी। ऐसे में चीन ने कैसे चमत्कारिक सफलताएं हासिल कर ली और भारत क्यों आज भी निम्न मध्यम आय वर्ग की श्रेणी वाले देशों में बना हुआ है। गौरतलब है कि चीन में प्रति व्यक्ति सालाना आमदनी दस हजार डॉलर से अधिक हो चुकी है जबकि भारत में यह अभी भी दो हजार डालर पर रुकी हुई है। जाहिर है दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर कोई तोड़ना ही नहीं हो सकती। जब घर आया है तो सैनिक, तकनीकी और अन्य तमाम तरह की प्रजातियों के रास्ते पर चीन आगे निकलकर दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति को चुनौती दे रहा है। भारत में भी इस बात को लेकर ईशा होनी चाहिए थी लेकिन हैरत अंगेज है कि इस खबर को एक सामान्य खबर की तरह जाने दिया गया। इसका मतलब यह है कि भारत में अब धनी होने और आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा भी चूकने लगी है। समाज का एक तबका इस मुगालते में है कि भारत विश्व गुरु बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है। बाकी समूह इस तबके के उठाए मुद्दों पर जवाब देने और उससे तू तू मैं मैं करने में उलझे हुए हैं। इस बीच विज्ञान और तकनीक में क्या प्रगति चल रही है और इसमें आगे निकलने की दुनिया में कैसी हो चल रही है उसके बीच भारत की क्या संभावना हो सकती है इन सब बातों को कभी दबा दिया गया है। परिवार और अपने मुद्दों पर लोग इस तरह उलझ कर रह गए हैं कि इन बातों पर सोचने की देश और समाज के बीच कहीं सुगबुगाहट ही दिखाई नहीं देती। यह इस बात का संकेत भी है कि हम और हमारा समाज पूरी तरह जड़ हो गए हैं। विकास और कुक जैसे स्तर पर हम इंडेक्स में बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी पीछे नजर आते हैं। अफसोस की बात यह है कि यह बातें देश के मानस को झकझोरने में नाकाम साबित हो रही हैं।

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