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11000 दीप जलाकर धुमधाम से मनाया भगवान श्रीदूधेश्वर प्राकट्य उत्सव

गाजियाबाद स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ श्री दूधेश्वर भगवान का 567 वा प्राकट्य उत्सव के शुभ अवसर पर बुधवार प्रात काल 3ः30 बजे श्रीमहंत नारायण गिरी जी महाराज श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर व मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष धर्मपाल गर्ग ने भगवान दूधेश्वर का पंचोपचार षोडशोपचार नमक चमक से रूदाअभिषेक किया गया जिसमें दूधेश्वर वेद विद्या पीठ के प्रधानाचार्य तोयराज उपाध्याय, आचार्य नित्यानंद एवं विद्यापीठ के आचार्य समस्त विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अभिषेक पूजन कर पुजन कि गई एवं शाम 6ः00 बजे आरती उसके उपरांत श्रृंगार सेवा समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल जी व उनके समस्त कार्यकर्ताओ द्वारा भगवान दूधेश्वर बाबा का भव्य रुप से दिव्य श्रृंगार किया

जिसमें 56 व्यंजनों द्वारा भोग भगवान को अर्पण किया गया तदोपरांत मंदिर के पुजारी स्वामी शिवानंद गिरी जी महाराज द्धारा धूप आरती की साथ दीप आरती की भगवान दूधेश्वर की विशेष महाआरती कि गई इसके बाद 11000 दीपक जला कर दीप दान किया एवं दूधेश्वर सिंगार सेवा समिति द्वारा 56 प्रकार भगवान का प्रसाद वितरण किया इसी के साथ एक दिवसीय श्री भगवान दूधेश्वर बाबा का प्राकट्य उत्सव बहुत धूमधाम से संपन्न से सम्पन्न किया गया । इस अवसर पर दूधेश्वर मंदिर को बहुत ही दिव्य रुप से सजाया गया।सभी भक्तों द्वारा 11000 दिए जलाए गये।

क्योकि आज भगवान दूधेश्वर को प्रकट हुये 567 साल पूरे हो चुके है आज से 568 वा वर्ष प्रारम्भ हो गया. मंदिर को विभिन्न रंग बिरंगी लाइटों से दुल्हन कि तरह सजाया गया जिसमें सभी दूधेश्वर मंदिर के भक्तों का विशेष सहयोग रहा साथ ही शाम 7 बजे सुप्रसिद्ध गायक श्री नवनीत प्रिय दास जी के द्वारा भजनों कि प्रस्तुति दी गई जिसमें सैकड़ों भक्तों भजनों का रसपान किया जो रात 11बजे तक लगातार चला एवं साथ मंदिर परिसर में एक विशाल भंडारे का आयोजन जिसमें सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया जिसमें मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरी जी महाराज प्रवक्ता श्रीपंचदशनाम जूना अखाडा कि अध्यक्षता में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर श्रुंगार सेवा समिति के अध्यक्ष विजय मि्तल, विजय सिंघल सदस्य दुधेश्वर मंदिर विकास समिति, शंकर झा, आचार्य लक्ष्मी कांत,दैवी मंदिर के महंत गिरिशानन्दगिरि महाराज,रमेशानन्द गिरि जी महाराज, महंत विजय गिरी जी महाराज आदि सैकड़ों भक्तों एवं साधु महात्माओं व गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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