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प्रदूषण ने अस्‍पतालों में बढ़ाई सांस के मरीजों की संख्‍या,बढ़ रहे हैं सांस और हृदय के मरीज

गाजियाबाद. दिल्‍ली -एनसीआर (Delhi – NCR) में बढ़ते प्रदूषण (Pollution) से सांस संबंधी मरीजों (Patients) की संख्‍या बढ़ने लगी है. एनसीआर के गाजियाबाद में सरकारी और प्राइवेट अस्‍पतालों (Hospitals) में रोजाना आने वाले मरीजों में 80 फीसदी सांस संबंधी बीमारी के हैं. इसके अलावा गंभीर रूप से बीमार लोगों को अस्‍पतालों में भर्ती करना पड़ रहा है. डॉक्‍टर सांस संबंधी बीमारी के मरीजों को घर पर रहने की सलाह दे रहे हैं.
गाजियाबाद स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अनुसार सरकारी और प्राइवेट अस्‍पतालों में रोजाना पहुंचने वाले मरीजों की संख्‍या 1000 से अधिक की है. इनमें से 800 के करीब मरीज सांस संबंधी बीमारियों के पहुंच रहे हैं. इसके साथ ही प्रदूषण की वजह से गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग अनिद्रा, गले में दर्द, खराश, सीने में दर्द की शिकायत लेकर अस्‍पताल में पहुंच रहे हैं.


जिले में चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, एमएमजी और संयुक्त अस्पताल के अलावा प्राइवेट में छह चेस्ट फिजिशयन और 158 फिजिशियन के पास इलाज के लिए आने वाले सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है. पांच दिन में जिले में 5000 मरीज इलाज कराने पहुंचे. इसमें से 4000 से अधिक सांस के मरीज थे. इन मरीजों में 1500 मरीजों ने सीने का एक्स-रे कराया, जिसमें 800 के करीब फेफड़े में इंफेक्शन पाया गया. गंभीर रूप से बीमार 200 के करीब मरीजों को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया. स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अनुसार मौजूदा समय अलग-अलग अस्पतालों में 59 मरीज भर्ती हैं, इनमें से 12 को ऑक्सीजन लगाने की जरूरत पड़ी.

क्या कहना है डॉक्टर का

एमएमजी अस्‍पताल के फिजीशियन डा. संतराम के अनुसार इस समय सबसे अधिक उन मरीजों को परेशानी हो रही है जो पहले से अस्थमा, सांस और हृदय के मरीज हैं, उन्हें खांसी अधिक आ रही है. कुछ मरीजों को अब दवाई की डोज दोगुनी तक करनी पड़ रही है.अस्पताल में प्रतिदिन 200 से 250 बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं. इनमें 70 फीसदी बच्चों को सांस लेने में परेशानी हो रही है. उन्हें नेबुलाइजर लगाने के साथ ही दवाई भी दी जा रही है. चूंकि बच्‍चे घरों से बाहर खेलने के लिए निकलते हैं इसलिए बीमार हो रहे हैं.

 

 

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