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आरटीआई कार्यकर्ता सचिन सोनी ने पुरानी सब्जी मंडी निकट घन्टाघर स्थिति फड़/दुकानों के संदर्भ में मांगी थी 7 बिंदुओ पर सूचना

नगर निगम के जनसूचना अधिकारी पर एक बार फ़िर लगा 25000/- (पच्चीस हजार) का जुर्माना

आयोग से पारित आदेश में सूचना उपलब्ध कराए जाने के आदेश न होने पर अपीलार्थी सचिन सोनी ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की

गाज़ियाबाद। सूचना अधिकार कार्यकता सचिन सोनी ने दिनांक 19-09-2018 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जनसूचना अधिकारी नगर निगम के समक्ष आवेदन कर पुरानी सब्जी मंडी निकट घन्टाघर के दुकान/फड़ के संदर्भ में कुल 7 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। सूचना का अधिकार अधिनियम में निहित प्रावधानों के अंतर्गत सूचना उपलब्ध न कराए जाने पर दिनांक 30-10-2018 को प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील योजित की गयी। किन्तु प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा भी नियमानुसार प्रथम अपील का निस्तारण न करने पर अपीलकर्ता द्वारा दिनांक 28-12-2018 को आयोग के समक्ष सूचना अधिकारी द्वारा सूचनाएं दिलाए जाने व सम्बन्धित अधिकारी को नियमानुसार दण्डित किए जाने की अपील की गयी।
आयोग द्वारा दिनांक 17-07-2019, 29-01-2020, व 15-07-2020 को सुनवाई करते हुए जन सूचना अधिकारी नगर निगम, गाजियाबाद डा. संजीव सिन्हा को सूचनाएं उपलब्ध कराए जाने के साथ ही दो प्रतियों में लिखित रूप से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के आदेश पारित किए। आयोग द्वारा जनसूचना अधिकारी को सचेत भी किया कि अन्यथा की स्थिति में आयोग द्वारा उनके विरुद्ध सूचना उपलब्ध न कराने का दोषी मानते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 (1) के प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
उ.प्र. सूचना आयोग द्वारा जन सूचना अधिकारी नगर निगम डा. संजीव सिन्हा को सूचनाएं उपलब्ध कराने हेतु पर्याप्त अवसर दिया गया। आयोग द्वारा पारित आदेश को पंजिकृत डाक से दिनांक 01-07-2019 व 31-12-2019 को नोटिस जारी किया गया था। किंतु जनसूचना अधिकारी द्वारा न तो आवेदक को सूचना उपलब्ध कराई गयी और न ही आयोग द्वारा पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद सुनवाई तिथियों पर आयोग के समक्ष समुचित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया। जिससे यह स्पष्ट हो सके कि अपीलकर्ता को सूचनाएं उपलब्ध कराने में सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन क्यों नहीं किया गया। उक्त से आयोग को स्पष्ट हो गया कि जनसूचना अधिकारी नगर निगम डा. संजीव कुमार सिन्हा (कर निर्धारण अधिकारी) सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 व आयोग के आदेशों के प्रति गम्भीर नहीं है।

आयोग ने कहा है कि उपरोक्त विवेचना में स्पष्ट है कि प्रस्तुत प्रकरण को लेकर जनसूचना अधिकारी गम्भीर नही है। पत्रावली पर भी ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नही है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जनसूचना अधिकारी द्वारा अपीलकर्ता को उसके मूल आवेदन के क्रम में वांछित सूचनाएं उपलब्ध कराई गयी हो। ऐसे में विपक्षी-डॉ. संजीव सिन्हा जन सूचना अधिकारी नगर निगम गाजियाबाद को अपीलकर्ता को उसके मूल आवेदन के क्रम में साशय सूचनाएं न उपलब्ध कराने का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 (1) के तहत 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से रुपये 25000/- का अर्थदंड अधिरोपित करते हुए वसूली का आदेश पारित किया गया है। अधिरोपित अर्थदंड की वसूली विपक्षी-डॉ. संजीव सिन्हा, जनसूचना अधिकारी नगर निगम के वेतन से अधिरोपित अर्थदंड की वसूली नियमानुसार कराए जाने हेतु आयोग द्वारा पारित आदेश की प्रति प्रमुख सचिव नगर विकास उ. प्र. शासन लखनऊ, नगर आयुक्त नगर निगम गाजियाबाद एवं जिला अधिकारी गाजियाबाद को अनुपालनार्थ नियमानुसार प्रेषित की गयी है।
आयोग से पारित आदेश में सूचना उपलब्ध कराए जाने का आदेश न होने के कारण सचिन सोनी ने आयोग में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है।

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