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जनता के साथ होता खेल

केंद्र सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने का जो शोर मचाया है वह भारतीय जनता के साथ एक भद्दा खेल है। पिछले कई माह से पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे थे। पेट्रोल और डीजल के दाम बेतहाशा ढंग से बढ़ाए जाने के विरोध में विपक्षी दल लगातार वह अल्लाह कर रहे थे लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा नेताओं के कानों पर जो भी नहीं रेंग रही थी। सरकार में बैठे नुमाइंदे यह कहकर बात टाल देते थे कि पेट्रोल और डीजल के दाम संबंधित कंपनी घटाती या बढ़ाती हैं । पेट्रोल और डीजल के दाम जिस समय सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए ₹100 प्रति लीटर से ऊपर कूद रहे थे तभी देश के अलग-अलग हिस्सों में तीन लोक सभा और 29 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए। उपचुनाव के नतीजे मध्य प्रदेश और आसाम को छोड़ दे तो सत्तारूढ़ भाजपा के लिए बहुत ही नुकसानदेह साबित हुए। हिमाचल प्रदेश जहां की भाजपा की सत्ता है वहां एक लोकसभा और चारों विधानसभा
क्षेत्रों का चुनाव भाजपा हार गई। यहां तक कि 1 विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार की जमानत तक जब्त हो गई। जो भाजपा सरकार विपक्ष के काफी हंगामे के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम कम नहीं कर रही थी, उस सरकार ने उपचुनाव में मिली हार के तुरंत बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में चिड़िया के चुग्गे जैसी कमी कर दी। पेट्रोल और डीजल के दाम ₹100 से ऊपर पहुंचा कर उसमें 7 और 10 रुपए कम करते हुए केंद्र सरकार ने ऐसा दिखावा किया मानो देश की जनता को उन्होंने बहुत बड़ा उपहार दे दिया है। बात यहीं खत्म नहीं हुई भाजपा नेताओं ने यह चिल्लाना शुरू कर दिया कि केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम कम कर दिए हैं और भाजपा कि राज्य सरकार पेट्रोल और डीजल पर वैट कम कर रही हैं ताकि दाम कम हो जाए केवल कांग्रेसी सरकारें वैट कम नहीं कर रही है। इस मुद्दे पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेट्रोल और डीजल दोनों ही अब आम आदमी के लिए जरूरी बन गए हैं। देश में रेल बंद हैं, सरकारी परिवहन सुविधाएं चरमरा रही हैं। छोटी-छोटी नौकरी करने वाले युवा दो पहिया वाहनों पर आपस में पूल कर नौकरी कर रहे हैं। सरकार ने यह देखने का प्रयास ही नहीं किया कि यह युवा इतने कम वेतन में अपने वेतन का बड़ा हिस्सा दोपहिया वाहन के पेट्रोल में खर्च कर रहे हैं। साथ ही डीजल किसान के लिए अत्यंत आवश्यक है और डीजल के दाम बढ़ते ही ट्रकों का माल भाड़ा बढ़ जाता है जो महंगाई बढ़ने का बड़ा कारण बनता है। सरकार में बैठे लोग ऐसा भी नहीं है कि इन बातों को नहीं जानते होंगे लेकिन इतना सब होते हुए भी पेट्रोल और डीजल के दाम ₹100 से ऊपर पहुंचने दिए गए। ऊपर से तुर्रा यह है कि अब महंगा पेट्रोल और डीजल खरीदने वाले लोगों से कहा जा रहा है कि सरकार ने दाम घटा दिए। सरकार ने दाम तो घटाये है लेकिन पेट्रोल और डीजल को ₹100 प्रति लीटर से ऊपर पहुंचा कर उसमें से सात व दस रुपए प्रति लीटर कम करते हुए ऐसा किया है मानो उपभोक्ताओं के जख्म पर नमक छिड़क दिया हो। अभी कहानी का पटाक्षेप नहीं है, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि कुछ समय बाद इन दोनों तरल पदार्थों का रेट फिर पुरानी जगह पर ना पहुंच जाए। हालत यह है कि देश की जनता इस महंगाई को झेल रही है और कुछ कह भी नहीं पा रही है। शायद निकट समय में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव तक पेट्रोल और डीजल के दाम बहुत अधिक ना बढ़ने पाएं लेकिन इसके बाद तो जनता को एक बार फिर मूंडा जाएगा।

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