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जीडीए में अधिकारियों की शह पर चुनिंदा ठेकेदारों को दिए जा रहे हैं नियम से हटकर ठेके

टेंडर बाक्स की सील तोड़ने के विवाद में भी भ्रष्टाचार का खेल

गाजियाबाद। गाजियाबाद महानगर के समुचित विकास के लिए गठित किया गया गाजियाबाद विकास प्राधिकरण इन दिनों न केवलइन दिनों आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है, इसके बावजूद अधिकारी इसकी नींव खोखली करने में आज भी पीछे नहीं हैं। चहेते ठेकेदारों को नियम विरुद्ध ठेके दिए जा रहे हैं, यहां तक कि ऑनलाइन टेंडर न मांग कर कार्यालय में रखी निविदा बॉक्स में टेंडर डलवा कर मनमर्जी की जाती है।
ताजा विवाद साहिबाबाद अंडरपास से वर्षा जल निकासी हेतु स्थापित सम्पवैल के वार्षिक अनुरक्षण व संचालन कार्य के लिए मांगे गए टेंडर का है। इस टेंडर में एक ठेकेदार पर आरोप है कि उन्होंने तय समय से बाद में टेंडर बॉक्स की सील तोड़ कर टेंडर डाला। इस कार्य के लिए 1 नवंबर तक टेंडर मांगे गए थे। निविदा प्रपत्र की पृष्ठ संख्या दो पर स्पष्ट उल्लेख है कि टेंडर 1 नवंबर के अपरान्ह 3:00 बजे तक डाले जाएंगे। टेंडर के नियम व शर्तों को दरकिनार करते हुए 2:30 बजे ही टेंडर बॉक्स पर सील लगा दी गई। अब एक ठेकेदार पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 2:30 बजे के बाद जब कि सील लगाई जा चुकी थी तब सील तोड़कर टेंडर डाला।
इस सारे मुद्दे पर कई सवाल उठ रहे हैं जो जीडीए में खुले तौर पर सुने जा सकते हैं। पहला सवाल यह है कि आखिर टेंडर ऑनलाइन क्यों नहीं मांगे जा रहे हैं। इस पर कहा जा रहा है कि कुछ चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने के लिए यह कार्य किया जा रहा है। निविदा प्रपत्र में खुले तौर पर 3:00 बजे का टाइम टेंडर डालने के लिए फिर 2:30 बजे टेंडर बॉक्स पर सील क्यों लगाई गई, साथ ही केवल ताले पर सील लगाई गई। इसके अलावा ठेकेदार ने यदि 3:00 बजे के बाद सील तोड़कर टेंडर डाला तो प्राधिकरण के किसी कर्मचारी या अधिकारी ने ठेकेदार को क्यों नहीं रोका। सवाल उठता है कि इस सारे मामले के पीछे भ्रष्टाचार को पोषित करने की मंशा तो नहीं थी। या फिर ठेकेदार के खिलाफ कुछ साजिश तो नहीं रची जा रही थी। इसके साथ ही सवाल यह भी उठ रहा है कि प्राधिकरण में अधिकारियों और बड़े ठेकेदारों की मिली भगत अनेक ठेकेदारों को भारी नुकसान पहुंचा रही है। अधिकारियों की बदौलत कुछ चहेते ठेकेदारों को नियम विरुद्ध ठेके दिए जा रहे हैं जिसका नुकसान छोटे स्तर पर काम करने वाले अनेक ठेकेदारों को भुगतना पड़ रहा है।

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