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विपक्षी दलों में अभी और सेंध लगाएगी भाजपा

कई विपक्षी नेता निकट भविष्य में थाम सकते हैं भाजपा का दामन

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गाजियाबाद। 2021 का अंतिम चरण राजनीतिक दलों में भारी उठापटक का गवाह बन सकता है। 3 विधानसभा क्षेत्रों में वर्तमान विधायकों की जगह दूसरे लोगों को चुनाव लड़ाने की आहट भाजपा क्षेत्रों से मिल रही है। चुनाव में मिलने वाली कड़ी टक्कर को देखते हुए भाजपा विपक्षी दलों में सेंध लगा रही है। जानकारी के अनुसार शीघ्र ही कई विपक्षी नेता भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं।
गौरतलब है कि लोनी, मुरादनगर और गाजियाबाद ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां भाजपा में ही अपने विधायक का विरोध हो रहा है। मुरादनगर में 2 दिन पूर्व गाजियाबाद के प्रमुख सर्राफ और शहर के एक दैनिक अखबार के डायरेक्टर गौरव मित्तल के साथ मुरादनगर में हुई लूट के बाद थाने में प्रदर्शन करने पहुंचे व्यापारियों का नेतृत्व भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंघल कर रहे थे। यह अलग बात है कि उन्होंने यह कहकर अपना बचाव किया कि वह भाजपा नेता के नाते व्यापारियों के साथ थाने में आए हैं। ज्ञानेंद्र सिंघल इससे पूर्व भी पार्टी के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त करते रहे हैं। सिंगल अकेले नेता नहीं है जो मुरादनगर में विरोध का स्वर उठा रहे हैं। चुनाव आते आते कई ऐसे लोग सामने आ सकते हैं जिन्हें यह कहा जाता है कि वह कट्टर भाजपाई हैं लेकिन इन दिनों उनके स्वर विरोध में सुनाई पड़ रहे हैं।
लोनी की स्थिति मुरादनगर से पूरी तरह अलग है। वहां भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ही भाजपा के दुश्मन साबित होते रहे हैं । नंदकिशोर गुर्जर चुनाव के बाद से ही लगातार विवादों में घिरे रहे हैं। यह बात लगातार सामने आती रही है कि भाजपा इस चुनाव क्षेत्र में किसी दूसरे आदमी पर अपना दांव लगा सकती है।
गाजियाबाद विधायक और प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री अतुल गर्ग के खिलाफ भाजपा के नेता व कार्यकर्ता बोलने में कोई गुरेज नहीं करते। कोरोना काल में गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल में किसी भी तरह की सुविधा न मिलने से आम जनता में उनके प्रति नाराजगी का बड़ा भाव है। यहां तक की भाजपा कार्यकर्ता भी अतुल गर्ग के खिलाफ खुलकर बोलने में किसी तरह का परहेज नहीं करते। चर्चा है कि अतुल गर्ग मुरादनगर से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं लेकिन मुरादनगर से भाजपा के ही सिटी विधायक अजीत पाल त्यागी हैं। मुरादनगर से अतुल गर्ग तभी चुनाव लड़ सकते हैं यदि अजीत पाल त्यागी का टिकट वहां से न हो। फिलहाल ऐसा संभव होता नजर नहीं आ रहा है।
मुरादनगर, लोनी और गाजियाबद वे विधानसभा क्षेत्र हैं जो भाजपा आलाकमान का सिर दर्द बढ़ाए रखेंगे। चुनाव से पहले ही नहीं चुनाव के दौरान भी इन 1 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का नेतृत्व लगातार परेशानियों में गिरा रहेगा। गाजियाबाद जनपद देश की राजधानी दिल्ली से एकदम सटा हुआ है। यह एक बड़ा कारण है कि दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों का बड़ा असर गाजियाबाद जिले में होगा ‌। विशेष तौर से राकेश टिकैत के असर वाले किसानों की वोट निश्चित तौर पर भाजपा के विरोध में जाएगी। गाजियाबाद में भाकियू से प्रभावित किसानों की संख्या काफी बढ़ी है जो चुनाव में भाजपा के लिए सिरदर्द बनी रहेगी।

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