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मनमानी पर उतारू हैं रोडवेज की अनुबंधित बसों के चालक व परिचालक

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गाजियाबाद। गाजियाबाद से मेरठ तक चलने वाली रोडवेज की अनुबंधित बसों के चालक व परिचालक मनमानी पर उतारू हैं जिस कारण कई बार यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। चालक परिचालक कभी भी तय रूट पर बस को न ले जाकर नए बने मेरठ एक्सप्रेसवे से बस को ले जाते हैं जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है।
गौरतलब है कि गाजियाबाद से मेरठ या मेरठ से गाजियाबाद आने जाने वाली बसों का मुख्य उद्देश्य रास्ते में पढ़ने वाले मोरटा, दोहाई, मुरादनगर, मोदीनगर, मोहिउद्दीनपुर, परतापुर आदि स्थानों पर यात्रियों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना है। मेरठ गाजियाबाद रूट पर लगभग सभी बसें रोडवेज के अधीन अनुबंधित होकर चल रही हैं जिसमें चालक बस ऑपरेटर का होता है जबकि परिचालक रोडवेज का। मेरठ गाजियाबाद रूट पर अधिकांश बसें सुबह से और चार या पांच बजे तक अपने ते किलोमीटर पूरी कर खड़ी हो जाती हैं। इसके बाद मेरठ की तरफ जाने वाले यात्रियों को गाजियाबाद स्थित पुराना बस अड्डा पर भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। परिणाम यह होता है कि अधिकांश यात्रियों को ऑटो रिक्शा का सहारा लेना पड़ता है जिसमें महिलाओं, बच्चों और वृद्ध सवारियों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है क्योंकि ऑटो रिक्शा वाले दोगुना से भी अधिक सवारियां भरकर ले जाते हैं।
इसके अलावा चालक परिचालक अपनी मनमर्जी से कभी भी दुहाई मुरादनगर से मोदीनगर के रास्ते ना जाकर नए बने मेरठ एक्सप्रेस वे के रास्ते निकल जाते हैं। रोडवेज बसों के चालक परिचालकों के इस मनमाने ढंग से परतापुर और गाजियाबाद के बीच के स्थानों पर जाने वाले यात्रियों को प्रतिदिन ही भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। यात्रीगण यदि चालक परिचालकों का विरोध करते हैं तो वे एकजुट होकर यात्रियों से मारपीट पर उतर आते हैं। पुराना बस स्टैंड पर मौजूद रोडवेज के अधिकारी आंख और कान बंद किए बैठे रहते हैं उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि यात्रियों को कैसी परेशानी उठानी पड़ रही है। यह स्थिति तब हो रही है जबकि रोडवेज प्रबंधन का दावा है कि वह यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।

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