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देश की राजधानी में भी महिला सुरक्षा सिरे से नदारद

बताया जाता है कि दिल्ली पुलिस अपनी कार्यकुशलता के कारण देश में अच्छी छवि के लिए जानी जाती है। इन दिनों इस बात का बिल्कुल उल्टा हो रहा है। देश की राजधानी जो बाकी देश के शहरों के लिए एक उदाहरण बनना चाहिए उसी राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा राम भरोसे हो गई है। वैसे तो लाकडाउन खत्म होने के बाद से ही दिल्ली में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इस बात की तस्वीर भारत सरकार का एनसीआरबी विभाग कर रहा है जो पूरे देश के अपराध संबंधी आंकड़े प्रस्तुत करता है। पिछले 24 घंटे के दौरान राजधानी दिल्ली में दो महिलाओं के साथ जो वहशियाना हरकत हुई है वह न केवल मानवता को शर्मसार करने वाली है बल्कि दिल्ली पुलिस के माथे पर भी कलंक है। दिल्ली के बाहरी क्षेत्र बवाना में बिहार के बक्सर क्षेत्र की एक युवती अपने पति के साथ रह रही थी। युवती के गांव का एक युवक जो उससे एक तरफा प्यार करता था उसने बहाने से अपने कमरे में बुलाकर युवती के हाथ पैर बांधने के बाद उसके पूरे शरीर पर तेजाब उड़ेल दिया। इसके बाद वह फरार हो गया जिसे दिल्ली पुलिस की एक टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बक्सर जाते समय रास्ते से गिरफ्तार किया है लेकिन उसकी गिरफ्तारी उस युवती की पीड़ा को किसी भी तरह कम नहीं कर सकती जो इस समय जिंदगी और मौत के बीच झूम रही है। युवती यदि जीवित रह जाती है तो वह जिंदगी भर अपने उस चेहरे के साथ मानसिक अवसाद के दौर में रहेगी जो तेजाब के कारण झुलस गया है। दूसरी घटना द्वारिका इलाके में हुई है जहां एक युवक ने नौकरी दिलाने के बहाने एक युवती को बुलाकर नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर न केवल उसके साथ दुष्कर्म किया बल्कि विरोध करने पर उसे बेरहमी के साथ पीटा। यही नहीं यूपी का चेहरा बिगाड़ने की नियत से उसने अपने हाथ में पहने भारी कड़े से उसके चेहरे पर वार किए। जिस होटल में यह वारदात हुई उस होटल के कर्मचारी और वहशी युवक युवती को मरने के लिए छोड़ कर कमरा छोड़ कर भाग गए। होश में आई युवती ने पुलिस को कॉल कर और अपनी लोकेशन फोन पर डालकर सूचना दी तब उसे अस्पताल ले जाया गया। दोनों घटनाएं साबित करती है कि राजधानी दिल्ली की पुलिस का खौफ बदमाशों के बीच नहीं है। एनसीआरबी के आंकड़े बता रहे हैं कि कोरोना काल के बाद जब लाकडाउन खत्म किया गया है उसके बाद से महिला अपराधों में 23 फ़ीसदी वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें घरेलू हिंसा के मामले भी शामिल है। दिल्ली के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना का कहना है कि पुलिस को महिला अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का आदेश दिया गया है। यह अलग बात है कि इससे पूर्व भी सभी अधिकारी इसी तरह के आदेश अपने अधीनस्थ अधिकारियों को देते रहे हैं। इसके बावजूद महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में कमी नहीं आती। इसका बहुत बड़ा कारण यह भी है कि पुलिस अधिकांश मामलों में कार्रवाई नहीं करती और पीड़िता को थाने से टरका दिया जाता है। बहुत से मामले ऐसे होते हैं इसमें पीड़िता और उसका परिवार पुलिस के धक्के खा खा कर हार कर अपने घर में बैठ जाता है। देश की राजधानी दिल्ली में यदि महिलाओं के प्रति अपराध इसी तरह होते हैं तो वह किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। दिल्ली में विश्व के उन देशों के दूतावास स्थित हैं जिनसे भारत के राजनयिक संबंध हैं। इसके अलावा भी लाखों की संख्या में विदेशी नागरिक दिल्ली में निवास करते हैं। यह सब होते हुए यदि महिलाओं के प्रति अपराध होते हैं तो यह देश की छवि के लिए काफी घातक की स्थिति होगी।

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