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मां के गहने बेचकर धनुष की मरम्मत कराई, तीर उधार में लिया :साक्षी चौधरी

मां के गहने बेचकर धनुष की मरम्मत कराई, तीर उधार में लिया :साक्षी चौधरी

पोलैंड में आयोजित हुई विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप में भारत को रजत पदक दिलाने वाली साक्षी चौधरी की निगाहें अब अगले वर्ष आयोजित होने वाले कामनवेल्थ और एशियन गेम्स पर टिक गई हैं। अभी वह पोलैंड में हैं और 17 अगस्त की सुबह भारतीय तीरंदाजी दल के साथ वापस भारत लौट रही हैं। उन्होंने पोलैंड में बदले मौसम में खुद को स्थापित कर उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने पहली बार अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व किया और उसी में भारत को रजत पदक दिलाया। भारत से पोलैंड तक के खेल सफर और चुनौतियों के साथ मौजूदा और भविष्य की तैयारियों को लेकर पोलैंड में मौजूद साक्षी चौधरी से आप अभीतक की टीम ने विस्तार से बात की।
आप अभीतक का सवाल : मई में आयोजित होने वाले एशिया कप आर्चरी चैंपियनशिप में चयन के बावजूद कोरोना संक्रमण के बीच यह रद हो गया। इस मुश्किल वक्त में आपने विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप की कैसे तैयारी की ? साक्षी चौधरी ने बताया कोरोना काल में पाबंदियों के बीच तीरंदाजी का अभ्यास नहीं छोड़ा। घर पर ही अभ्यास में जुटी रहीं। इसके बाद दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित सैनी भवन के मैदान पर देवांश आर्चरी अकादमी में रहकर अभ्यास किया। लाकडाउन के बाद अकादमी जाने के लिए प्रतिदिन करीब 70 किलोमीटर का सफर तय किया। जूनियर एशिया कप में चयन हुआ, लेकिन वह रद हो गया, लेकिन अभ्यास जारी रखा। उसी का परिणाम है कि अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।

आप अभीतक का सवाल : कोरोना संकटकाल में आपके परिवार को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी। इस बीच तीरंदाजी का साज-ओ सामान जुटाने में किन परेशानियों का सामना करना पड़ा? – काफी मुश्किल समय था, जब पोलैंड जाने के लिए ट्रायल में चयन पक्का हुआ, उस समय न खर्च के लिए पैसा था और न कंपाउंड और तीर ही थे। ट्रायल से पहले धनुष के रिलीजर के टूट जाने पर उनकी मां को सोने की अंगूठी बेचने पड़ी। तीर तक नहीं थे, सहेली से उधार तीर लेकर हिस्सा लेने गई। कहीं से कोई आर्थिक मदद नहीं मिल सकी। खुश हूं कि उधार के ऐरोज से भारत को पदक दिलाने में सफल हुई। –
आप अभीतक का सवाल : यह आपकी पहली अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता थी। वहां के माहौल, मौसम को लेकर किस तरह की चुनौतियां सामने आईं? – वहां का मौसम बेहद ठंडा है। इसके अलावा पोलैंड के समय में करीब साढ़े तीन घंटे का फर्क है। भारत में दोपहर के 12 बजते हैं तो पोलैंड में सुबह के साढ़े आठ। समय को समायोजित करने में परेशानी हुई। वहीं, पोलैंड में चैंपियनशिप के दौरान हवा तेज चल रही थी, जिससे तीरंदाजी के दौरान निशाना लगाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

आप अभीतक का सवाल : विदेश और अपने यहां खेल सुविधाओं के बारे में क्या कहेंगी ? साक्षी चौधरी ने बताया खेल सुविधाओं की कमी है तभी प्रतिदिन अभ्यास के लिए दिल्ली जाना पड़ता है। गाजियाबाद में महामाया स्टेडियम है, लेकिन यहां न कोच हैं और न अभ्यास के लिए ग्राउंड ही मिलता है। ऐसे में हम क्या करें। विदेशों में बेहतर सुविधाएं हैं यह कहने की बात नहीं है, लेकिन हमें सुविधाएं मिलें तो हम हर खेल में विदेशियों को मात दे सकते हैं। – आप अभीतक का सवाल : विश्व युवा चैंपियनशिप के बाद अब आगे की क्या तैयारी है। कोई लक्ष्य निर्धारित किया है आपने ? -इस जीत के साथ ही अगली तैयारी दिमाग में तो शुरू हो गई है। भारत लौटने के बाद अगले साल होने वाले कामनवेल्थ और एशियन गेम्स पर ही नजर रखकर कड़ा अभ्यास शुरू करुंगी। ताकि इस बार अपने देश के लिए स्वर्ण पदक ला सकूं।

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