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सपा-रालोद के पंचायत चेयरमैन प्रत्याशियों को चन्द्रशेखर का समर्थन

सपा-रालोद के पंचायत चेयरमैन प्रत्याशियों को चन्द्रशेखर का समर्थन, उप्र में यूथ लीडरशिप की तिगडी बनने के आसार!

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सत्यपाल चौधरी
उप्र के जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और अब सभी राजनीतिक दल अपना अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने को लेकर सक्रिय हैं। उप्र में समाजवादी पार्टी अपने सबसे ज्यादा सद्स्य जिताने में कामयाब हुई है तो किसान आन्दोलन के साये में रालोद का प्रदर्शन भी जबरदस्त रहा है। अपने पहले ही चुनाव में एक साल पुरानी आजाद समाज पार्टी ने अपने धमाकेदार प्रदर्शन से सबको चौंका दिया है। भीम आर्मी चीफ़ और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चन्द्रशेखर आजाद को खासकर दलित युवाओ ने सामाजिक आन्दोलन के साथ ही राजनीतिक क्षेत्र में भी दिल खोलकर समर्थन दिया है। बसपा और दूसरे दलित विरोधी नेताओ के चन्द्रशेखर के भाजपा से मिले होने को चन्द्रशेखर ने अनेक बार गलत सिद्ध किया है और कैराना लोकसभा उप चुनाव में भाजपा के खिलाफ रालोद सपा गठ बन्धन प्रत्याशी को जेल के भीतर से ही समर्थन देने से लेकर अपने ऊपर भाजपा शासनकाल में दर्ज मुकदमों का हवाला देकर साफ़ किया है कि वे साम्प्रदायिक ताकतो को रोकने के लिये प्रतिबद्ध हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी सपा रालोद प्रत्याशियों को समर्थन भी चन्द्रशेखर की उसी प्रतिबद्धता का हिस्सा माना जा रहा है। चन्द्रशेखर के इस फैसले को लेकर युवाओ में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। 2022 के विधान सभा चुनाव को लेकर युवा और राजनीतिक विश्लेषक कयास लगाने में जुट गए हैं। मुजफ्फर नगर, बिजनौर,सहारनपुर और अलीगढ जैसे पश्च्मी यूपी के जिलों में जिला पंचायत चुनाव में युवाओ ने इसी उम्मीद में चन्द्रशेखर पर वोट बरसाये थे,ऐसा विश्लेषक मानते हैं।
उधर अखिलेश यादव की मिलनसार छवि युवाओ को बहुत भाती है, उनके पिछ्ले कार्यकाल को लोग याद करते हैं। किसान आन्दोलन में आर एल डी के स्टैंड, जयंत चौधरी की किसान रैलियां और किसानो के शेष नेता चो अजित सिंह के निधन से पश्चिमी यूपी में किसानो मे सहानुभूति की लहर है। अखिलेश,जयंत और चन्द्रशेखर तीनो युवा हैं और अपनी राजनीतिक पकड साबित कर चुके हैं। अखिलेश यादव के पास तो प्रशासनिक अनुभव और विपरित परिस्थितियों में लड़ने की सामर्थ्य भी है। जयंत भी विधान सभा और लोक सभा में प्रतिनिधित्व देते हुए किसानो के सवालो पर अपनी मुखरता जाहिर कर चुके हैं तो टाईम मेगजीन में विश्व के सौ प्रभावशाली लोगो में शामिल होकर चन्द्रशेखर भी यह साबित कर चुके हैं कि वे जेल में रहे या जेल के बाहर सामजिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष में उनका कोई सानी नही है। जिला पंचायत चुनाव के बहाने बढी इन तीनो यूथ आइकॉन नेताओं की नजदीकी को विश्लेषक 2022 के उप्र चुनाव में एक नए प्रयोग के तौर पर देख रहे हैं। खासकर युवाओ में इस सम्भावना को लेकर जबरदस्त उत्साह है। उप्र में आजकल भाजपा के भीतर बढ़ रही बैचेनी का एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है। देखना होगा कि यूपी के इन तीनो यूथ नेताओ की राजनीतिक समझ क्या फैसला लेती है। (लेखक आजाद समाज पार्टी,भीम आर्मी के प्रवक्ता हैं)

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