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दिल्ली: सात भाइयों की इकलौती बहन ने दिया चार लोगों को जीवन

एक महिला मरीज की मौत के बाद परिवार ने दूसरों की जान बचाने का फैसला लिया। अस्पताल के डॉक्टरों ने चार लोगों की जान बचाई।

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कोरोना महामारी के चलते अंगदान पर काफी असर पड़ा है, जिसकी वजह से उन सैकड़ों मरीजों की जान पर बन आई है जिन्हें प्रत्यारोपण कराना है। हालांकि, दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती एक महिला मरीज की मौत के बाद परिवार ने दूसरों की जान बचाने का फैसला लिया। अस्पताल के डॉक्टरों ने चार लोगों की जान बचाई।

43 वर्षीय महिला को 20 मई को अस्पताल में भर्ती किया था। कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद महिला को सामान्य वार्ड में भर्ती किया गया, लेकिन परीक्षणों से पता चला कि उसे गंभीर ब्रेन हैमरेज हुआ है और पुनर्जीवन के सभी प्रयासों के बावजूद उसे ब्रेन डेड घोषित करना पड़ा। सात भाइयों के बीच इकलौती बहन की मौत ने पूरे परिवार को सदमे में ला दिया, लेकिन उचित काउंसलिंग के बाद परिवार ने अंगदान का फैसला लिया।

अस्पताल के डॉ. नैमिश एन. मेहता ने बताया कि प्रत्यारोपण के लिए इंतजार सूची काफी लंबी है। कोरोना महामारी के चलते अंगदान की दर में काफी कमी आई है। उनके यहां अभी 179 मरीज लीवर और 484 मरीज किडनी प्रत्यारोपण के इंतजार में हैं। भारत में अंगदान दर प्रति मिलियन जनसंख्या पर 0.65 से 1 के बीच है, जबकि स्पेन में यह 35 और अमेरिका में 26 है।

उन्होंने बताया कि परिवार ने जब अंगदान का फैसला लिया तो उन्हें काफी खुशी हुई। एक 58 वर्षीय व्यक्ति की जान बचाई जो लिवर प्रत्यारोपण के लिए इंतजार में दो साल से था। प्राप्त किए गए अन्य अंग दो किडनी और हृदय थे। अस्पताल में ही एक अन्य मरीज को किडनी दी गई। इसके बाद एक किडनी और हृदय को दूसरे अस्पताल भेजा गया।

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