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संकट काल में उछल कूद और लफ्फाजी इनका शगल रहा है, महामारी के इस काल में भी यही हो रहा है

लोमड़ी और बन्दर दोनो ने अपनी अपनी दावेदारी पेश की

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आओ एक कहानी सुनो ! एक बार जंगल के राजा शेर के खिलाफ जंगल के अन्य जानवरो और पशु पक्षियों ने विद्रोह कर दिया। सबने पंचायत की और राजा बदलने का प्रस्ताव रखा। लोमड़ी और बन्दर दोनो ने अपनी अपनी दावेदारी पेश की। लोमड़ी को चालाक तो माना जा रहा था लेकिन छ्ल कपट और लफ्फाजी के मामले में वह बन्दर के आगे टिक नही सकी। बन्दर ने अपना घोषणा पत्र ऐसा बनाया कि शेर से हर जानवर की रक्षा, खाने पीने की बढिया सुविधा और बेहतर जीवन के सुनहरे सपनो से सबको ऐसा मन्त्र मुग्ध किया कि बन्दर जंगल का राजा निर्वाचित हो गया। जंगल में सब और खुशी का माहौल था कि चलो शेर के आतंक से मुक्ति मिली। बन्दर ने जंगल के नाम अपने पहले संदेश में जंगल वासियों का आह्वान किया कि सबकी रक्षा करना हालांकि उसकी जिम्मेदारी है फ़िर भी सभी जानवर खुद भी सजग रहें और आत्मनिर्भर बने। बन्दर के अनुयाईयों ने ताली थाली बजाकर बन्दर के इस लोक लुभावन संदेश का जोरदार स्वागत किया। कुछ दिन बाद शेर जानवरो की सजगता के कारण शिकार के लिये तरसने लगा तो उसने जंगल में कोहराम मचा दिया। बेरोजगारी, भूख, महंगाई और असुरक्षा की मानिन्द शेर ने जंगल में तांडव मचा डाला । जंगल में खलबली मची और अफरा तफरी में सभी जानवर इधर उधर दौडने लगे, तभी किसी ने सलाह दी कि राजा के पास चलकर शेर के आतंक को बताया जाये और इससे मुक्ति का कोई रास्ता निकालने की गुहार लगाई जाये। सब इकट्ठे होकर बन्दर के पास पहुंचे और शेर के जंगल में हर और फैलाये आतंक को रोकने की मांग करने लगे। बन्दर उनकी बात सुनकर पेड पर चढ़ गया कि वह शेर की लोकेशन चेक करके कोई समाधान निकालता है। बन्दर पेड पर चढ़ गया और शेर जानवरो के नजदीक पहुंच कर उनकी खाल नोचने तक पहुंच गया। जानवर असहाय होकर बन्दर से रक्षा की गुहार करने लगे। बन्दर एक डाल से दूसरी डाल पर कूद फांद करता रहा, जानवरों ने आखरी गुहार लगाई कि देखो शेर हम सबको खा जायेगा,कोई ठोस उपाय करो।इस पर बन्दर ने जवाब दिया कि वह भाग दौड कर तो रहा है। पेड की एक एक डाल पर जा रहा है। मेरी भाग दौड़ में कोई कमी नही है,बाकि आपका नसीब है। कोरोना महामारी,डीजल, पेट्रौल,गैस सहित सरसों के तेल और दाल के बढते रेट, बेरोजगारी, भुखमरी से देश हल्कान है और राजा कह रहा है कि उसकी भाग दौड़ में कोई कमी नही है। वह सी एम,डी एम सबसे बात कर रहा है लेकिन उसके पास लोगो का जीवन बचाने और बेहतर जीवन देने का कोई प्लान नही है। वह किसानो को डी ए पी पर सब्सिडी देता है तो कट्टे के रेट दुगने कर देता है। दरअसल राजा एक सोच और नस्ल का प्रतिनिधित्व करता है। यह उन पंडे पुजारियों का वारिस है जिन्होने सोमनाथ के मन्दिर को लूटने आए गजनी को हवन और मन्त्रो से अन्धा कर देने का दावा किया था। मन्त्रो और हवन से गजनी अन्धा नही हुआ और मन्दिर को लूट कर ले गया, पंडे पुजारी हवन बीच में ही छोडकर भाग गए। यह उनका भी वारिस है जिन्होने विदेश से भारत आकर सिन्धु घाटी की सभ्यता तबाह की और कृतज्ञ घन्ता और अश्लीलता की सभ्यता फैलाकर भारत की पहचान ही धूमिल कर दी और यह उनका भी असली वारिस है जिन्होने चक्रवर्ती भारत के सम्राट वृहदत्त की हत्या करके राज्य पर छ्ल कपट से कब्जा कर लिया और फ़िर राज्य की व्यवस्था ना सम्भलने पर इस देश को टुकडे टुकडे कर रियासतों में बांट दिया। जंगल के जानवरो ने जो फैसला लिया,वह बचकाने में लिया गया फैसला था,देश के हालात देखकर लगता है कि भारत की जनता ने भी बचकाना फैसला लिया था,जिसका पूरा देश खामियाजा भुगत रहा है।

सत्यपाल चौधरी

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